Hitherto Unknown Secrets !

Panchamukhi MARUTI !

पंचमुखिमारुतिस्तोत्र

अस्य श्रीहनुमन्महामन्त्रस्य

श्रीपंचमुखिहनुमान देवता

हानुमाान इति बीजम्

वायुसुत इति शक्तीः

अंजनासुत इति कीलकं

ॐ श्रीरामचंद्रवीरहनुमतप्रसादसिद्धयर्थंसकललोकोपकारार्थम्  पंचमुखिकवचस्तोत्रमंत्रजपे विनियोगः

ॐ अंजनासुताय अंगुष्ठाभ्याम नमः

ॐ रुद्रमूर्तये तर्जनीभ्याम् नमः

ॐ वायुपुत्राय मध्यमाभ्याम् नमः

ॐ अग्निगर्भाय अनामिकाभ्याम नमः

ॐ रामदूताय कनिष्ठिकाभयाम नमः

ॐ पंचमुखिहनुमते करतलकरपृष्ठाभ्याम नमः

[ एवं हृदयादिन्यासः ]

अथ ध्यानम्

उद्यन्मार्तंडकोटीरुचिरमययुतम् चारुवीरासनस्थम् मौंजीयज्ञोपवीताभरणमुरुजटाशोभितम् कुण्डलाभ्याम  ॥ भक्तानामिष्टदम् तम् प्रणयमनुदितम् वेदनादप्रणादम् ध्यायेद्देवम् विधेयंप्लवगकुलपतीम गोष्पदीभूतवार्धिम् ॥

श्रीरामचंद्रदूताय अंजनावायुपुत्राय महाबलाय सीतादुःखनिवारणाय लंकादहनकारणाय महाभयप्रचंडाय फाल्गुनसखाय कोलाहलसकलब्रम्हांडविश्वरुपाय सप्तसमुद्रनिरालंबिताय पिंगलनयनायामितविक्रमाय सूर्यबिंबफलसेविताय दुष्टनिरालंकृताय अंगदलक्ष्मणकपिसैन्यप्राणनिर्वाहकाय  दशकंठविध्वंसनाय रामेष्टाय फल्गुनसखाय सीतासमेतरामचंद्रप्रसादकाय ॥

षटप्रयोगागम- पंचमुखिहनुमंतम् ध्यात्वा

ॐ ह्रीं मर्कटमर्कटाय वं वं वं वं वं वषट स्वाहा ॥

ॐ ह्रीं मर्कटमर्कटाय फं फं फं फं फं फट  स्वाहा ॥

ॐ ह्रीं मर्कटमर्कटाय खें खें खें खें खें मारणाय स्वाहा ॥

ॐ ह्रीं मर्कटमर्कटाय ठं ठं ठं ठं ठं ठं स्तंभनाय स्वाहा ॥

ॐ ह्रीं मर्कटमर्कटाय ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  आंक्रसि सकलसंपतकराय स्वाहा॥

ॐ कं खं गं ङ घं चं छं जं झं ञ टं ठं डं ढँ णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं सं शं षं हं ळं क्षं स्वाहा ॥[इति दिगबंधः]

ॐ पंचमुखिवीरहनुमते ऊर्ध्वमुखीहयग्रीवाय रुं रुं रूं रुं रुं रुद्रमूर्तये सकलनिर्वाहकरणाय  स्वाहा

ॐ  पंचमुखिवीरहनुमते पूर्वेकपिमुखाय ढं ढं ढं ढं ढं कवचमूर्तये  सकलशत्रुसंहाराय  स्वाहा

ॐ  पंचमुखिवीरहनुमते दक्षिणे नृसिंहायमुखाय  हां हां हां हां हां  करालमूर्तये  सकलभुतप्रेतदमनाय  स्वाहा

ॐ  पंचमुखिवीरहनुमते पश्चिमे गरुडमुखाय  मं मं मं मं मं  नीलकँठमूर्तये  सकलविषहराय स्वाहा

ॐ पंचमुखिवीरहनुमते उत्तरे वराहमुखाय लंलंलंलंलं आदिमुर्तये सकलदोषहराय स्वाहा

पंचमुखिहनुमते अंजनासुताय वायुपुत्राय सीताशोकदुःखनिवारणाय द्रोणाद्रिवरहरणाय श्रीरामचंद्रपादसेवकाय माहावीर्यप्रथमब्रम्हांडनायकाय पंचमुखिमाहावीरहनुमतेनमः ॥ भूतप्रेतपिशाचब्रह्मराक्षसग्रहपरमंत्रपरतंत्रोच्चाटनाय स्वाहा ।सकलनिर्वाहकरणायपंचमुखिहनुमद्वरप्रसादकाय जंजंजंजंंजं इतिकवचम पठेत ॥

Comments on: "Panchamukhi MARUTI !" (22)

  1. satyanarayan agrawal said:

    SALUTATIN TO HARI 1755 6 TIME-10.52AM FROM-KOLKATA BEETLE LEAVES-5,NUTS-4,FRUITS-6,BIRTH PLACE-KOLKATA,TIME-9.45 PM,DATE OF BIRTH-KOLKATA,RIGHT EAR,PROBLEM-SHORTFALL OF FINANCES DAY BY DAY AND ACCUMULATION OF HUGE DEBTS ON REGULAR BASIS,DISAPPOINTED WITH OWN LIFE,SALUTATION TO HARI

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  2. brigga223 said:

    Sir, isnt this the same as panchamukhi hanumat kavacha????? Thanks for uploading this… What does this part mean: “ॐ श्रीरामचंद्रवीरहनुमतप्रसादसिद्धयर्थंसकललोकोपकारार्थम्”

    I want to know the meaning of “sakala lokopakaaraartham” specifically..

    brigga223

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  3. sameer said:

    thanks

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Dear Readers , If you are asking a query , Kindly do not forget to worship SRIMAN NARAYANA and HANUMANJI and then write a number within 1800 followed by single digit number [ within 1-8 ] ,kindly Give time and current Place where you are asking query from ! , followed by number of virtual beetle leaves ,nuts and fruits you would like to give astrologer , and clear place ,time and date of birth . [take your hands off keyboard ] TOUCH a BODY part and kindly mention which part of the body Your hand is touching [ sprishtanga ] .... state your problem clearly , let us know what is it that your are looking for without ambiguity ! start and end with salutation to HARI ! If above procedure is not adhered to ,then no answers will be given !

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